सबूत नहीं कि हिजाब पहनना इस्लाम की एक जरूरी प्रथा है. –इलाहाबाद हाई कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने साफ कर दिया है कि हिजाब इस्लाम का जरूरी हिस्सा नहीं है. हाई कोर्ट ने यह फैसला एक मुस्लिम लड़की की याचिका को खारिज करते हुए दिया, जिसमें उसने अपनी स्कूल यूनिफॉर्म के साथ हिजाब पहनने की इजाजत मांगी थी. अदालत ने कहा कि वह यह साबित करने के लिए सबूत पेश नहीं कर पाई कि हिजाब पहनना इस्लाम की एक जरूरी प्रथा है.
यह फैसला जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने दिया. बेंच ने यह भी कहा कि कोई छात्रा तय ड्रेस कोड में बदलाव की जिद नहीं कर सकती, अगर वह ड्रेस कोड एक जैसा, सही नीयत वाला, बिना भेदभाव वाला और संस्थान की पहचान बनाए रखने के मकसद से बनाया गया हो.
ऐसा ही फैसला 2022 में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी सुनाया था. इसका हवाला देते हुए इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा कि उसके पास कर्नाटक हाई कोर्ट के फैसले से अलग राय रखने का कोई ‘कारण’ नहीं है. उस फैसले में कर्नाटक हाई कोर्ट ने भी कहा था कि हिजाब पहनना इस्लाम धर्म में कोई जरूरी प्रथा नहीं है (courtesy India TV) (UPDATED ON 25TH AUGUST 26)



