मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायक प्रताप ग्रेवाल – उच्च शिक्षित युवा आज भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं।

मध्य प्रदेश विधानसभा में विधायक प्रताप ग्रेवाल द्वारा पूछे गए प्रश्न के उत्तर में तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास एवं रोजगार मंत्री गौतम टेटवाल ने बताया कि 30 जून 2026 की स्थिति में प्रदेश के रोजगार पोर्टल पर 17,71,132 युवा रोजगार की प्रतीक्षा में जीवित पंजीकृत हैं।
विधायक प्रताप ग्रेवाल ने बताया कि सरकार द्वारा दिसंबर 2025 में उपलब्ध कराए गए आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में रोजगार की तलाश में 25.96 लाख युवा पंजीकृत थे। इनमें 3,16,892 दसवीं पास, 9,78,564 बारहवीं पास, 6,17,231 स्नातक, 2,29,116 स्नातकोत्तर तथा 4,53,877 अन्य शिक्षित युवा शामिल थे। छ महीने में 8.25 लाख बेरोजगार कैसे कम हुए
जबकि अब सरकार के नवीनतम उत्तर के अनुसार 30 जून 2026 को रोजगार पोर्टल पर केवल 17,71,132 युवा पंजीकृत हैं। इनमें 1,70,718 दसवीं पास, 5,01,474 बारहवीं पास, 7,29,708 स्नातक, 2,32,905 स्नातकोत्तर तथा 1,36,327 अन्य शिक्षित युवा शामिल हैं। यह दर्शाता है कि बड़ी संख्या में उच्च शिक्षित युवा आज भी रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। और सरकार आकड़ो में फेर बदल कर रही है
सामाजिक वर्ग के अनुसार अनुसूचित जाति के 3,32,046, अनुसूचित जनजाति के 2,98,621, अन्य पिछड़ा वर्ग के 7,12,612 तथा सामान्य वर्ग के 4,27,853 युवा रोजगार की प्रतीक्षा में पंजीकृत हैं। वहीं 8,31,661 महिलाएं तथा 9,39,471 पुरुष रोजगार की उम्मीद में पोर्टल पर दर्ज हैं।
प्रताप ग्रेवाल ने सरकार के आंकड़ों पर गंभीर सवाल उठाते हुए कहा कि दिसंबर 2025 से जून 2026 के बीच मात्र छह माह में रोजगार पोर्टल पर पंजीकृत बेरोजगारों की संख्या लगभग 8.25 लाख कैसे कम हो गई, जबकि इसी अवधि में सरकार के अनुसार निजी क्षेत्र में केवल लगभग 2,700 युवाओं को ही ऑफर लेटर जारी किए गए। उन्होंने कहा कि सरकार स्पष्ट करे कि शेष लाखों युवाओं के नाम पोर्टल से किस आधार पर हटाए गए।
सरकार ने अपने उत्तर में यह भी बताया कि 30 जून 2017 से जून 2026 तक निजी क्षेत्र में कुल 8,17,744 युवाओं को ऑफर लेटर जारी किए गए हैं। लेकिन सबसे गंभीर बात यह है कि सरकार ने स्वयं स्वीकार किया है कि ऑफर लेटर जारी होने के बाद यह निरीक्षण या निगरानी नहीं की जाती कि संबंधित युवाओं को वास्तव में रोजगार मिला या नहीं।
सरकार के पास यह जानकारी भी उपलब्ध नहीं है कि कितने युवाओं ने नौकरी ज्वाइन की, कितनों को नौकरी से निकाल दिया गया, कितनों ने स्वयं नौकरी छोड़ दी तथा कितने आज भी कार्यरत हैं। इतना ही नहीं, सरकार ने यह भी स्वीकार किया है कि शासकीय नौकरियों का समेकित रिकॉर्ड भी विभाग के पास उपलब्ध नहीं है।
प्रताप ग्रेवाल ने कहा कि यह स्थिति साबित करती है कि प्रदेश की रोजगार व्यवस्था केवल पंजीयन और ऑफर लेटर जारी करने तक सीमित होकर रह गई है। युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। सरकार को यह बताना चाहिए कि छह माह में लाखों बेरोजगार आखिर कहां गए और रोजगार के दावों का वास्तविक आधार क्या है। केवल आंकड़ों में कमी दिखाकर बेरोजगारी समाप्त नहीं हो जाती, बल्कि युवाओं को वास्तविक, स्थायी और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना सरकार की जिम्मेदारी है। (UPDATED ON 20TH JULY 2026)



