-टैक्स व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी बनाया जा सकता है।

–. सीए मनोजजैन–
देश की अर्थव्यवस्था निरंतर प्रगति कर रही हैए लेकिन साथ ही छोटे और मध्यम व्यवसायों को बढ़ते अनुपालनोंए महँगाईए और कर संबंधी जटिलताओं से भी जूझना पड़ रहा है। आगामी बजट में यदि कुछ ठोस कदम उठाए जाएँए तो श्ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेसश्को और वास्तविक रूप दिया जा सकता है तथा टैक्स व्यवस्था को और अधिक पारदर्शी एवं करदाता.हितैषी बनाया जा सकता है। नीचे कुछ प्रमुख सुझाव प्रस्तुत हैंर-
ईज़ ऑफ डूइंग बिज़नेस के लिए अनुपालन कम किए जाएँ
आज एक छोटा व्यवसाय शुरू करना अपेक्षाकृत आसान हैए लेकिन जैसे ही व्यवसाय बढ़ता हैए उसे दर्जनों कानूनों और नियमों का पालन करना पड़ता है कृ जिनमें आयकरए जीएसटीए श्रम कानूनए कंपनी अधिनियम आदि शामिल हैं। इससे उद्यमी का ध्यान व्यवसाय से हटकर कागज़ी कार्यवाही में लग जाता है। सरकार को चाहिए कि व्यवसाय के आकार और टर्नओवर के आधार परचरणबद्ध अनुपालन व्यवस्थालागू करे कृ ताकि छोटे व्यवसायों पर अत्यधिक बोझ न पड़े और वे सहज रूप से बड़े बन सकें।
महँगाईपरनियंत्रणकेठोसकदम
आम जनता की जीवन.यापन लागत लगातार बढ़ रही है। सरकार को खाद्य वस्तुओंए ईंधन और आवश्यक उपभोग वस्तुओं पर कर का पुनर्मूल्यांकन करना चाहिए तथा लॉजिस्टिक्स और वितरण लागत कम करने के उपाय अपनाने चाहिए। इससे महँगाई पर वास्तविक नियंत्रण संभव होगा।
जीएसटीपंजीकरणसीमाबढ़ाईजाए
छोटे व्यापारियों को राहत देने के लिए जीएसटी पंजीकरण की सीमा बढ़ाई जानी चाहिए। वर्तमान सीमा कम होने के कारण अनेक सूक्ष्म उद्यमी अनावश्यक रूप से अनुपालन के दायरे में आ जाते हैं। सीमा बढ़ाने से व्यापारिक गतिविधियों में सुगमता और औपचारिक अर्थव्यवस्था में विश्वास दोनों बढ़ेंगे।
पुरानेटैक्सरेजीममेंआयकीसीमाबढ़ाईजाए
आयकर के पुराने रेजीम में छूट की सीमा में वर्षों से कोई बड़ा परिवर्तन नहीं हुआ है। बढ़ती महँगाई और क्रय शक्ति में कमी को देखते हुए इस सीमा में यथोचित वृद्धि आवश्यक हैए जिससे आम करदाताओं को राहत मिलेगी और उपभोग में वृद्धि होगी।
ग्रुप इंश्योरेंस पर जीएसटी समाप्त किया जाए
कर्मचारियों के हित में नियोक्ता द्वारा लिया गयाग्रुप इंश्योरेंसएक सामाजिक सुरक्षा उपाय हैए न कि कोई वाणिज्यिक सेवा। इस पर लगने वाला जीएसटी अंततः कर्मचारियों पर बोझ डालता है। सरकार को ऐसे ग्रुप इंश्योरेंस को जीएसटी से मुक्त करना चाहिए ताकि नियोक्ता अपने कर्मचारियों को अधिक व्यापक बीमा कवरेज प्रदान कर सकें।
आयकर अपीलों के निपटान के लिए निश्चित समय सीमा
वर्तमान में आयकर अपीलों का निपटान कई वर्षों तक लंबित रहता हैए जिससे करदाता और प्रशासन दोनों पर अनिश्चितता बनी रहती है। प्रत्येक स्तर पर ;ब्प्ज्;।द्ध से लेकर प्ज्।ज् तकद्ध अपीलों के निपटान हेतु निश्चित समयसीमा तय की जानी चाहिए।
लेटफीसऔरपेनल्टीकायुक्तिकरण
जीएसटी और आयकर कानूनों में देर से रिटर्न भरने या गलती होने पर भारी लेट फीस और पेनल्टी लगती हैए जो छोटे करदाताओं के लिए अत्यधिक बोझ बन जाती है। इन्हें कारोबार के आकार या टर्नओवर के अनुसार तर्कसंगत बनाया जाना चाहिए।
टीडीएसध्टीसीएसप्रावधानोंकासरलीकरण
टीडीएस और टीसीएस के प्रावधान अत्यधिक जटिल होते जा रहे हैंए जिससे छोटी इकाइयों को दिक्कतें होती हैं। सरकार को इन प्रावधानों का पुनरीक्षण कर इन्हें सरल और समझने योग्य बनाना चाहिए।
स्टार्टअप्सऔरएमएसएमईकोप्रोत्साहन
स्टार्टअप्स और एमएसएमई क्षेत्र रोजगार सृजन का बड़ा माध्यम हैं। इनके लिए कर रियायतेंए आसान ऑडिट मानदंड और पूंजी तक सुगम पहुँच सुनिश्चित की जानी चाहिए।
डिजिटलऔरहरितनिवेशकोबढ़ावा
डिजिटल भुगतानए सौर ऊर्जाए इलेक्ट्रिक वाहनों और पर्यावरण हितैषी परियोजनाओं में निवेश करने वालों को अतिरिक्त टैक्स लाभ दिए जाने चाहिए। इससे सतत विकास को बल मिलेगा।
फ्रीबीयोजनाओंपरनियंत्रण
विभिन्न राज्यों और केंद्र सरकारों द्वारा दी जा रही श्मुफ़्त योजनाएँश् अल्पकालिक राजनीतिक लाभ तो देती हैंए परंतु दीर्घकाल में यह राजकोषीय अनुशासन को कमजोर करती हैं। ऐसी योजनाओं पर पुनर्विचार आवश्यक है ताकि सरकारी संसाधनों का उपयोग उत्पादक क्षेत्रों कृ जैसे शिक्षाए स्वास्थ्य और बुनियादी ढाँचे कृ में हो सके।
निष्कर्ष
बजट केवल कर संग्रह का माध्यम नहीं होना चाहिएए बल्कि उसे आर्थिक प्रगति और करदाताओं के विश्वास को सशक्त करने वाला दस्तावेज़ बनना चाहिए। यदि सरकार उपरोक्त सुझावों पर गंभीरता से विचार करेए तो यह बजट व्यापारए रोजगार और विकास कृ तीनों ही स्तरों पर सकारात्मक प्रभाव डालेगा। (UPDATED ON 31ST JANUARY 2026)



