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-वर्ष 2047 का ढोल बजे पर कमियों को पूरा करना जरूरी


-शेखर कपूर


देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में शामिल करना चाहते हैं। यह सोंच, मानसिकता और विषय हिंदुस्तान के लिए बहुत बेहतर है लेकिन इसके साथ ही जो विकसित देश इस वक्त विश्व में हैं उनका अनुसरण करना जरूरी होगा। उदाहरणतः अधिकांश विकसित देशों में अपराध शून्य के आसपास, स्कूली शिक्षा मुफ्त, चिकित्सा अधिकांशतः पूरी तरह मुफ्त, बेरोजगारी ना के बराबर, सभी के लिए शिक्षा अनिवार्य, भ्रष्टाचार का जन सामान्य स्तर पर नामोनिशान ना होना, पर्यावरण एवं स्वच्छता पर पूरी तरह ध्यान देने जैसे विषय शामिल हैं। लेकिन इसके लिए भारत को कड़े कानून, बलात्कार एवं धर्म परिवर्तन पर नियंत्रण, जनसंख्या नियंत्रण एवं राजनीति में अपराधीकरण का धरातल तक मौजूद रहना जैसे विषय हल करने होंगे और तभी भारत विकसित राष्ट्रों में शामिल हो पाएगा। हालांकि मुख्य बात यह भी है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्रित्व काल में तो यह कल्पना साकार होने की संभावना है लेकिन वर्ष 2047 तक मोदी की भावना वाला व्यक्तित्व भी राष्ट्रीय राजनीतिक परिदृश्य में आ जाना चाहिए। क्योंकि मृत्यु अंतिम सत्य है।

इस वक्त भारत में तेजी से पूंजी निवेश हम देख रहे हैं। इस वक्त हम भारत में रेल, सड़क और हवाई मार्ग का विकास भी देख रहे हैं लेकिन वास्तविकता यह भी है कि देश के सभी राज्यों में गरीबी का साम्राज्य सर्वत्र दिखायी पड़ता है। एक बड़ी आबादी चाहे वो देशी हो या घुसपैठिये वाली हमारे शहरों की बस्तियों, मोहल्लों, रेल की पटरियों के आसपास, ग्रामीण क्षेत्रों और सुदूर वर्ती इलाकों में दिखायी पड़ती है। आज रोजगार के अवसर बढ़े हैं लेकिन बढ़ती जनसंख्या के अनुपात में नहीं। उच्च शिक्षित वर्ग के लिए भारत में भी जगह है और विदेशों में भी लेकिन निचले स्तर पर जो मध्यमवर्गीय परिवार और रोजगार के साधन हैं अभी भी विकसित भारत की कल्पना को साकार करने में रोड़ा हैं।

यह बात भी ध्यान में रखनी होगी कि विश्व के विकसित राष्ट्र इस वक्त जनसंख्या नियंत्रण, वक्त के साथ चलना, आंतरिक स्तर पर रोजगार के अवसरों में वृद्धि, विदेशी बेरोजगारों के प्रवेश पर नियंत्रण जैसे रास्ते अपना रहे हैं। चीन का उदाहरण इस मामले में सबसे अनुकूल हैं। इस देश ने जनसंख्या पर नियंत्रण करने के साथ ही अपने देश में बाहरी बेरोजगारों के प्रवेश पर नियंत्रण कर अपने देश के लोगों को रोजगार के अवसर देने के कदम उठाने के साथ ही ज्ञान और विज्ञान को अमेरिका से आगे निकाल दिया है। निचले स्तर के कारोबार जैसे नाई की दुकान, फल सब्जी कारोबार, सभी प्रकार के वाहनों की मरम्मत के कारीगर, सफाई कर्मियों जैसे रोजगार के साधनों को विकसित कर अपने देश के नागरिकों की आय को बढ़ाने की तरफ कदम बढ़ायें हैं जबकि भारत में अभी भी निचले क्रम के कार्य एवं कारोबार को शिक्षित वर्ग ने मान्यता नहीं दी है।

इसी प्रकार भारत में जो योजनाएं लागू होती हैं उनका लक्ष्य तक ना पहुंचना भी मूल गलती रही है। उदाहरण के लिए मोदी सरकार ने स्मार्ट सिटी की जो शुरूआत की थी उसे 10 वर्ष हो चुके हैं लेकिन शायद ही कोई ऐसा राज्य होगा जो सड़क यातायात नियंत्रण, गटर लाइनें, पर्यावरण, स्वच्छता सहित नागरिक जरूरतों के विभिन्न विषयों को पूरा कर चुका है विषय पर सच्चाई के साथ सच्चाई बताने की स्थिति में हो। अर्थात वर्ष 2047 तक अगर विकसित राष्ट्र के लक्ष्य को पार करना है तो प्रभावी, कड़े और दूरदर्शितापूर्ण कदम उठाने के साथ ही ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा की संस्कृति भी हर हिंदुस्तानी की नसों और रक्त तक पहुंचाना जरूरी होगी।


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