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बच्चों के लिए 1098 तथा महिलाओं के लिए हेल्पलाइन (181) 24×7

लोकसभा में आज लापता महिलाओं और बच्चों के संबंध में एक महत्वपूर्ण प्रश्न पर चर्चा हुई। बालाघाट–सिवनी लोकसभा क्षेत्र की सांसद श्रीमती भारती पारधी द्वारा पूछे गए तारांकित प्रश्न क्रमांक 203 के उत्तर में महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्न पूर्णा देवी ने सरकार द्वारा उठाए गए कदमों की जानकारी दी। कि देश में लापता एवं बरामद महिलाओं और बच्चों के आंकड़े राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा संकलित किए जाते हैं। यह आंकड़े उसकी वार्षिक रिपोर्ट ‘क्राइम इन इंडिया’ में प्रकाशित किए जाते हैं, जो वर्ष 2023 तक उपलब्ध है।

श्रीमती अन्न पूर्णा देवी ने कहा कि किशोर न्याय (बच्चों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत बच्चों की सुरक्षा, संरक्षण और पुनर्वास के लिए राज्य एवं जिला स्तर पर बाल कल्याण समितियां (CWC), किशोर न्याय बोर्ड (JJB), जिला बाल संरक्षण इकाइयां और विशेष किशोर पुलिस इकाइयां गठित की गई हैं। इनका उद्देश्य लापता बच्चों के मामलों में त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

मंत्री ने बताया कि कठिन परिस्थितियों में बच्चों के लिए 1098 चाइल्ड हेल्पलाइन तथा महिलाओं के लिए महिला हेल्पलाइन (181) 24×7 संचालित की जा रही है, जिन्हें आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली 112 से जोड़ा गया है।

श्रीमती अन्न पूर्णा देवी ने बताया कि नए आपराधिक कानून भारतीय न्याय संहिता, 2023 में मानव तस्करी और शोषण के विरुद्ध कठोर दंड का प्रावधान किया गया है। साथ ही, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) को अंतरराज्यीय एवं अंतरराष्ट्रीय प्रभाव वाले मामलों की जांच का दायित्व सौंपा गया है। देशभर में 827 मानव तस्करी रोधी इकाइयां (AHTU) कार्यरत हैं तथा पुलिस थानों में 14,653 महिला सहायता डेस्क स्थापित की गई हैं।

मंत्री ने स्पष्ट किया कि ‘पुलिस’ और ‘लोक व्यवस्था’ राज्य सूची के विषय हैं, अतः मानव तस्करी और लापता मामलों से निपटने की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों/संघ राज्य क्षेत्रों की है। हालांकि, केंद्र सरकार समय-समय पर एडवाइजरी, वित्तीय सहायता और तकनीकी सहयोग प्रदान करती है।(UPDATED ON 14TH FEB 26)


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