-इंडस्ट्री सेक्टर पूरी तरह केंद्र का विषय हो

सुनील अग्रवाल
आर्थिक विषय विशेषज्ञ एवं उद्योगपति
एमपी नगर,भोपाल
भारत सरकार की ओर से केंद्रीय वित्तमंत्री श्रीमती निर्मला सीतारण ने वर्तमान वर्ष 2026 का जो बजट प्रस्तुत किया है वह सराहनीय है। बजट में भारत की नीति और नियत पर जोर दिया गया है तो साथ ही एमएसएमई सेक्टर पर ध्यान देने की बात कही गई है। इसी प्रकार प्रधानमंत्री के प्रयासों के बाद इस वक्त भारत यूरोपीय संघ के 50 देशों ने अपने दरवाजे भारतीय उद्योगपतियों के माल के निर्यात को लेकर खोलने की बात कही है। लेकिन इसके लिए कई विषयों पर ध्यान देना होगा। उदाहरण के तौर पर देश के सभी राज्यों की औद्योगिक नीतियां अलग-अलग हैं। इसका परिणाम यह होता है कि औद्योगिकीकरण, निर्यात, आयात, रोजगार जैसे विषयों पर समानता नहीं आ पाती है तो कई विषयों पर उद्योग जगत को विभिन्न तरह के नियमों में उलझना पड़ता है। मेरा सुझाव है कि इस दिशा में एक राष्ट्रीय नीति जरूरी है जिसमें सभी उद्योग समान रूप से सुविधाओं को प्राप्त कर सकें और उन पर मात्र केंद्र सरकार से जुड़े नियम और कानून ही प्रभावी हांे। इस बात को ध्यान में रखा जाए कि हर उद्योगपति अपने उत्पाद और व्यवसाय को राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सतर पर पहुंचाना चाहता है लेकिन राज्य स्तर के नियम उसे सर्वाधिक प्रभावित करते हैं। इसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्रों को हवाई अड्डों की सुरक्षा की तरह सुरक्षा देने की जरूरत है। अभी सभी औद्योगिक क्षेत्र उद्योगपतियों की नजर में असुरक्षित हैं। सीआरपीएफ जिस तरह एयरपोर्ट्स की सुरक्षा करती है ठीक उसी प्रकार औद्योगिक क्षेत्र इस श्रेणी में आने चाहियें।
इस बजट में 12.2 लाख करोड़ का रिकॉर्ड इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश किया गया है, जिससे सड़क, रेल, बंदरगाह, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्षेत्रों को मजबूती मिलेगी तथा लाखों नए रोजगार के अवसर सृजित होंगे तो इसलिए मेरे सुझाव इस दिशा में मील का पत्थर साबित होंगे।
हालांकि अभी बजट पर संसद में चर्चा चल रही है और कुछ संशोधन भी होंगे। मेरे सुझावों को अगर वित्तमंत्री बजट का हिस्सा बनाती हैं तो इससे उद्योग जगत सर्वाधिक उन्नति करेगा।(UPDATED ON 2ND FEBRUARY 2026)



